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जींद उपचुनाव में फंसा पेच, शहर तय करेगा जीत किसकी

जींद का उपचुनाव दिन ब दिन दिलचस्प होता जा रहा है। दिलचस्प इसलिये क्योंकि मुकाबला जबरदस्त है। कोई भी उम्मीदवार इस स्थिति में नहीं है कि वो सबसे आगे नजर आ रहा हो। जींद विधानसभा में जो गांव पड़ते हैं उनमें जेजेपी आगे नजर आ रही है तो शहर में बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को टक्कर देते नजर आ रहे हैं। जींद का मुकाबला इसलिए तिकोना हो गया है क्योंकि कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतार दिया। बीजेपी उम्मीदवार मिढ़ा के साथ पूरी सरकार नजर आ रही है तो कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला के हक में इस बार प्रदेश कांग्रेस के सभी बड़े दिग्गज प्रचार कर रहे हैं। जेजेपी के दिग्विजय चौटाला के साथ दुष्यंत चौटाला, उनकी माता नैना चौटाला और युवा जोश प्रचार में जुटा है। वहीं इनेलो उम्मीदवार उमेद रेढ़ू के लिये अभय सिंह चौटाला अपनी फौज के साथ मैदान में जुटे हुये हैं।

सभी पार्टियों की ओर से पूरा जोर लगाया जा रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री ने भी प्रचार करना शुरू कर दिया है। इस चुनाव में एक बात बड़ी खास है कि जातिगत समीकरण देखते हुये सभी पार्टियों की ओर से अपने अलग अलग जाति के नेताओं को उसी समुदाय के क्षेत्र में भेजा जा रहा है। छोटी छोटी सभाएं की जा रही हैं। चाय पानी के बहाने नेता अपनी अपनी जाति के घरों में पहुंच रहे हैं।

बीजेपी ने तकरीबन सभी नाराज नेताओं को मना लिया है टेकराम कंडेला को छोड़कर। कंडेला किसी को हां या ना नहीं कर रहे हैं वो भी स्थिति को भांप रहे हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है। एक बात और जो सामने आ रही है वो ये कि कंडेला खाप में भी लोगों की अपनी अपनी राय है वो उस हिसाब से ही चलेंगे।

कांग्रेस इस वजह से मुकाबले में है क्योंकि सभी बड़े नेता हाईकमान के कहने पर खुल कर प्रचार कर रहे हैं। रणदीप सुरजेवाला धीरे धीरे शहर में अपनी पकड़ मजबूत करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं दिग्विजय चौटाला गांवों में तो मजबूत दिखाई दे ही रहे हैं साथ ही शहर में भी कोशिश की जा रही है कि थोड़े और वोट हासिल कर स्थिति को मजबूत बनाया जा सके।

वहीं इनेलो के उमेद रेढ़ू क्योंकि कंडेला खाप के हैं तो कहीं ना कहीं उनको लग रहा है कि आखिर में खाप उसका ही साथ देगी। अभय चौटाला ने एक रणनीति के तहत लोकल उम्मीदवार को चुना है। अभय के साथ साथ उनकी पार्टी के विधायक और अभय चौटाला के दोनों बेटे करण चौटाला और अर्जुन चौटाला भी प्रचार में जुटे हैं। उमेद रेढ़ू जितना मजबूत होंगे उतना ही नुक्सान दिग्विजय चौटाला को होगा।

लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का उम्मीदवार जितना वोट लेगा वो बीजेपी के लिये ही नुक्सानदायक होगा। बीजेपी की कोशिश है कि किसी तरह उस समुदाय को साथ मिलाया जाये जिस समुदाय के नेता को लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।

तो कुल मिलाकर अभी मुकाबला तिकोना है। हालांकि सभी बड़े नेता प्रचार में जुट चुके हैं फिर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि किन दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है या कोई एक सबसे आगे है।

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