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मुख्यमंत्री हरियाणा को एक लाख रूपये का चेक भेज कर किसने दी चुनौती

ऑनलाइन मकानों के नक्शे स्वीकृत करने का सिस्टम हुआ फ्लॉप

52 दिन में सिर्फ 3 नक्शे पूरे प्रदेश में हो पाए जमा

मुख्यमंत्री को एक लाख रु का चेक भेज आरटीआई एक्टिविस्ट ने सरकार को दी चुनौती

ऑनलाइन भवनों के नक्शे स्वीकृत करने की स्कीम को भ्रष्टाचार की गंगोत्री और फ्लॉप शो बताते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने एक लाख रूपये का बैंक चेक औऱ मांगपत्र मुख्यमंत्री को भेजकर नई स्कीम की सफलताएं बताने की चुनौती दी है। साथ ही ज्ञापन द्वारा इस नई स्कीम को तत्काल बंद करने, नक्शे जमा कराने की  पुरानी स्कीम को शुरू करने और नई वेबसाइट को यूजर्स फ्रैंडली बनाने की मांग की है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि भवनों के नक्शे ऑनलाइन स्वीकृत करने की स्कीम का जनाजा उठ चुका है। नई स्कीम से भ्रष्टाचार पहले से कई गुणा बढ़ गया है। पहले 52 दिन में पूरे हरियाणा के 10 नगर निगमों, 18 नगर परिषदों औऱ 52 नगर पालिकाओं में मात्र कुल तीन नक्शे जमा हो पाना नई स्कीम की विफलता का सबूत है। इससे रोजाना सरकार को एक करोड़ रूपये राजस्व की हानि हो रही है। इसके इलावा लाखों रूपये रोजाना का लेबर वेलफेयर सैस चार्ज भी नहीं मिल पा रहा। जबकि नई स्कीम शुरू होने से पहले पूरे हरियाणा में रोजाना करीब 100 भवनों के नक्शे जमा होते थे। अब नक्शे ना पास होने से अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है। नक्शे स्वीकृत कराने वाले लोग भटक रहे हैं। नई स्कीम का वेबसाइट यूजर्स फ्रैंडली नहीं है। ऑनलाइन नक्शे अपलोड करना आसमान से तारे तोडक़र लाने के समान है। कपूर ने एक लाख रूपये का बैंक चेक मुख्यमंत्री को भेजकर नए ऑनलाइन पोर्टल की सफलताएं बताने की चुनौती दी है कि अगर सरकार इसकी एक भी सफलता बता दे तो एक लाख रूपया सरकारी खजाने में वो जमा कराने को तैयार है।

क्या है चैलेंज….

(1) हरियाणा सरकार बताए कि ऑनलाइन मकानों के नक्शे स्वीकृत करने की नई स्कीम कैसे सफल है? स्कीम शुरू करने से कितने नक्शे जमा हुए, स्कीम शुरू करने से पहले रोजाना कितने नक्शे जमा होते थे और सरकार बताए कि नया सिस्टम लागू करने के उपरांत रोजाना हो रही एक करोड़ रूपये की राजस्व हानि के लिए कौन जिम्मेदार है। लेबर वेलफेयर सैस चार्ज का कितना रोजाना नुकसान हो रहा है।
(2) शहरी स्थानीय निकाय विभाग का कोई एक भी कर्मचारी नए ऑनलाइन सिस्टम से किसी एक मकान का नक्शा बनाकर स्वीकृत कराके दिखा दे।
(3) ऐसी क्या इमरजेंसी आ गई थी कि बिना स्टाफ और निजी आर्किटेक्ट्स को ट्रेनिंग दिए और निजी आर्किटेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन किए बगैर रातों रात बिना तैयारी नया ऑनलाइन वेब-पोर्टल शुरू करना पड़ा।

आरटीआई एक्टीविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि कैसे ये सिस्टम ठीक हो सकता है…..

1. भवनों के नक्शे ऑनलाइन स्वीकृत कराने के सिस्टम को तत्काल बंद करके पुराना सिस्टम बहाल किया जाए।
2. वेबसाइट को यूजर्स फ्रैंडली बनाया जाए।
3. डिप्लोमा होल्डर आर्किटेक्ट सिविल इंजीनियर्स के लाइसेंस बहाल हों।

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